गुरुवार, 24 दिसंबर 2015

हम अपने बलिदानियों को विस्मृत कर चुके

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हम अपने बलिदानियों को विस्मृत कर चुके 


       भोगवादी और भौतिकवादी संस्कृति से घिरे हम आज तक यह विस्मृत कर चुके है कि हमारी स्वतन्त्रता जिसका सम्मपूर्ण स्वभिमान के साथ हम भरपूर आनन्द उठा रहें हैं उन्हीं बलिदानियों बीर सेनानियो के संघर्ष त्याग तथा बलिदानो की देन है जिनके ऋण से मुक्ति अनंत काल तक संभव नही है ।किन्तु अपनी स्वार्थी महत्वकांक्षाओं की मरीचिका में भटककर उन अमर शहीदों को भुला चुकने की कृतध्नता की कलंक कथा हमने मात्र कुछ दशको में ही लिख डाली है हमारे वे मुक्तिदाता जिन मूल्यों की स्थापाना बीजरूप में कर गये उन्हें पल्लवित पुष्पित करने के बाजार हम अपने स्वार्थो की बिष बेलो से घिर कर आत्म मुग्ध है ।हमारी इस संकीर्ण एवं विकृत प्रव्रती के दुषपरिणाम आने लगे है ।अपने अतीत ऋणदाताओं के पूज्यनीय त्याग और बलिदान से पूरी तरह अपरिचित और अनभीज्ञ है वर्त्तमान पीढ़ी।परिणाम स्वरूप हम अपने गौरवशाली अतीत की श्रृंखला में एक बैभवयुक्त और गर्व किये जाने योग्य वर्त्तमान के निर्माण में सफल नही हो सकें है ।देश लूट रहा है पिट रहा है आततायी , और अराजक निशाचरी शक्तियों का आतंक देश के जन जीवन के लिये स्थाई अभिशाप बनता जा रहा है ।

अनाचार के विरुद्ध

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अनाचार के विरुद्द



जिस देश और समाज में अनाचार और अन्याय के विरुद्ध गुस्सा मर जाय वहां फिर किसी चाणक्य को नन्द के कुशासन के विरुद्ध शिखा खोलनी पड़ती है ।

जीवन एक समर भूमि है

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यह दुनिया एक समर भूमि है




यह दुनिया आदमी के मन की दया पर नही बल्कि उसकी कलाई की ताकत पर चला करती है ।आदमी की दुनिया में चल रही सारी दौड़ धूप केवल भोग के लिये होती है ।त्याग की बात मन्दिर , पुराण और कीर्तन में ही ठीक लगती है लिकिन जीवन कोई मन्दिर नही वह एक समर भूमि है ।

पंथ की बाधा बनोगे क्या मोम के बंधन

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पंथ की बाधा बनेगे क्या मोम के बन्धन




पंथ की बाधा बनेगे क्या
मोम के बन्धन
सजीले भूल जाओगे क्या
देख तितलियों के पर रंगीले
विश्व का क्रंदन डुबो देगी
मधुप की मधुर गुनगुन डूब जाओगे क्या
देख फुल दल ओस गीले देख
अपनी छांह को मत
अपने लिये कारा बनाना
जाग तुझको दूर जाना ---------------

कोई दीवाना समझता है कोई पागल समझता है

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कोई दीवाना कहता है


कोई दीवाना कहता है
कोई पागल समझता है
मगर धरती की बैचैनी तो
बस बादल समझता है
मैं तुमसे दूर कैसे हूँ
तू मुझसे दूर कैसे हो
ये तेरा दिल समझता है
ये मेरा दिल समझता है ।

मुहब्बत

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मोहब्बत एक एहसासो की पावन कहानी है 



मोहब्बत एक एहसासो की पावन कहानी है
कभी कबीरा दीवाना है कभी मीरा दीवानी है
यहां सब लोग कहते है मेरी आँखो में आंसू है
जो तू समझे तो मोती है न समझे तो पानी है ।