बुधवार, 3 फ़रवरी 2016

23 दिसम्बर 1912 को लार्ड हार्डिंग पर बम

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जिन बलिदानियों को हम भूल गए ।

      23 दिसम्बर , 1912 ई. को लार्ड हार्डिंग पर बम 23 दिसम्बर , 1912 ई, के दिन लार्ड हार्डिंग की सवारी दिल्ली से निकलने वाली थी । जगह- जगह भारी सुरक्षा की व्यवस्था थी । शानो - शौकत की तमाशा देखने के लिये अपार जन समूह एकत्र था ।बादशाही ठाट में सजे - सजाये हाथी पर लार्ड बैठे झूम रहे थे ।आगे पीछे फ़ौज पुलिस की कतार ...। सवारी कोतवाली के सामने से मारवाड़ी लाइब्रेरी के पास पहुची तभी बम का जोरदार धमाका हुआ ।लार्ड का अंगरक्षक औंधे मुहँ गिर कर दम तोड़ रहा था और लार्ड औंधे मुहँ गिर पड़ा । संयोग से लार्ड बच गया । कुछ देर बाद लार्ड अपने जगह पर दिखाई पड़े ।और उनकी सवारी आगे निकल गई ।उसके बाद उपस्थित दर्शको को घेर लिया गया ।उनकी घण्टो तलाशी हुई ।महिलाओं को तलाशी के दौरान अपमानित किया गया । पर बम फेकने वाले का पता न चला ।


            लॉरेंस गार्डेन , लाहौर के एक बम केस में पुलिस श्री अवध बिहारी लाल को खोज रही थी ।राजा बाजार कलकत्ता में एक छापे मारी के दौरान उनका पता पुलिस को मिल गया ।उस पते के आधार पर पुलिस अमीरचंद के घर की तलाशी ली । अमिरचन्द्र दिल्ली के कॉम्ब्रिज मिशन है स्कुल में अध्यापक थे ।घर में अवध बिहारी लाल अपने दो साथी के साथ एक टोपी बम के साथ पकड़े गए ।साथ में लाहौर से भेजा गया दीनानाथ का एक पत्र भी सी . आई.डी. वालो के हाथ लग गया । उस समय मास्टर घर पर नही थे ।पर उनका दत्तक पुत्र सुलतान मौजूद था ।पुलिस उन सबको पकड़ कर ले गई ।रास्ते में मास्टर अमीचन्द घर लौटते समय पुलिस के हाथो लग गए ।


            सुलतान को डरा धमाकर पुलिस ने अपना पक्षधर बना लिया । वह घर में आने जाने वाले क्रांतिकारियों का पता बता दिया ।साथ ही दीनानाथ के लिखावट को भी पहचान कर पुलिस को बता दिया ।दिल्ली षड्यंत्र के नाम से मुकदमा चला । मास्टर अमीरचंद , अवधबिहारी लाल , बालमुकुंद और बसन्त कुमार को फंसी की सजा मिली । संगठनकर्ता रासबिहारी बोस इन लोगो के गिरफ्तारी के बाद दिल्ली छोड़ दिए ।


          देहरादून के फारेस्ट रिसर्च इंस्टीच्यूट में हेड क्लर्क रासबिहारी बोस थे ।उसने अमेरिका के सुप्रसिद् हिन्दुस्तानी विद्रोही लाला हरदयाल के एक शिष्य दीनानाथ , अवध बिहारी , बालमुकुंद को पर्चा बाटने और बम फेकने के लिये ठीक किये ।उनका एक बंगाली नौकर बसन्त कुमार विश्वास भी इस काम में उन लोगो का सहयोगी था । दिल्ली बम कांड केस में जैसी गवाही हुई उसे साबित हो गया की लार्ड पर बम फेकने में इनका हाथ था । इस मामले में अवध बिहारी , अमीरचंद और बसन्त को फांसी की सजा हुई ।पर आश्चर्य की बात , रासबिहारी बोस इतना अत्यंत बलवान और भीमकाय पुरुष थे पर कैसे पुलिस से बच कर भाग गए ।

              आगे लाला हरदयाल और रास बिहारी बोस एवं अनेक क्रान्तिकारीयों को जिनके बलिदानो के फलस्वरूप हम आज़ाद हुए , जिन्हें हम जानते तक नही या हम भूल चुके उन क्रांतिकारीयों के करनामें ।

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