सोमवार, 1 फ़रवरी 2016

माँ का पैर दबाना भी मुहब्बत है

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अपनी माँ का पैर दबाना भी मुहब्बत है 

  


 किसी बिमारी की अयादत को .. जाना भी मुहब्बत है ।

 किसी भूखे को दो रोटी खिलाना भी मुहब्बत है ।।

 बहुत तन्हा शज़र दीखता है पर हकीकत नही है ये ।

 बनाना किसी शाख़ पर आशियाना भी मुहब्बत है ।। 

 मज़ा देती है तन्हाई जो जीने का सलीका हो ।

 कभी तन्हाई में कुछ गुनगुना भी मुहब्बत है ।।

 हो अखलाख दिल में तो , इबादत है बहुत आसाँ । 

कि अपनी माँ का पैर दबाना भी मुहब्बत है ।। 

 इस इश्क में अश्को के आगे भी बहुत कुछ है ।

 किसी के आँख से आंसू चुराना भी मुहब्बत है ।।

रोचक

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