शनिवार, 2 जनवरी 2016

दिल पर रख कर हाथ कहो , यह कैसी आज़ादी है

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अंग - अंग रंग गुलाब , तन पर झिलमिल खादी है

दिल पर रख कर हाथ कहो , यह कैसी आजादी है ।




अंग- अंग रंग गुलाब, तन पर झिलमिल खादी है ,
दिल पर रख कर हाथ कहो , यह कैसी आज़ादी है ।
छुपे थे चम्बल बिहड़ में , अब नेता है आज़ादी है ,
कानून पुलिस देख रही है , वारंट पर रोक लगादी है ,
गनर सुरक्षामैनो जो कहते है यह अपराधी है ,
अपराधतंत्र के चक्रव्युह में , लोकतंत्र ही अपराधी है ,
दिल पर रख कर हाथ कहो यह कैसी आज़ादी है ।
कानून शिकंजा निर्धन पर , नेता का छुटकारा है ,
कुटिल तन्त्र में फसा न्याय , कानून निपट बेकारा है ,
नये नये जयचन्दों ने भारत माँ को बंधक पुनः बना दी है ,
दिल पर रख कर हाथ कहो यह कैसी आज़ादी है ।।

फिर भी मेरा देश महान

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मेरा देश महान 


सिद्धान्तों को मलेरिया ,
संस्कारो को टीबी ,
ईमानदारी को एड्स ,
और चरित्रहीनों की शान है ,
फिर भी मेरा भारत महान है ।
माया छोड़ने का उपदेश देने वाले
स्वयं हो गये मायावी ,
उनके हाथो को लग गई है
ब्लैक को व्हाइट करने की चाभी ,
अपने लिये चांदी का सिंहासन
भक्तो के लिये चटाई ,
भक्तो के लिये नल का गंगाजल
अपने लिये मेवा मिठाई ,
धर्म से अधिक धर्मात्मा की शान है ,
फिर भी मेरा देश महान है ।
तपस्या को धुप न लग जाय
इसलिये बाबा जी ac गाडी से निकलते है ,
और शायद अपने देश की मिटटी मैली हो गई है ,
तभी तो बाबा जी लड़कियो के दुपट्टे पर चलते है ,
धर्म से अधिक धर्मात्मा की शान है ,
फिर भी मेरा देश महान है ।
वोटो की जमीन पर धर्म , और जातं- पात की खेती हो रही है,
फिर जिसको मौका मिला वो उस पे राजनीति की रोटी सेक रहे है ,
बेघर हो गए कितने निर्दोष , सच्चे ,
और यतीम हो गए न जाने कितने मासूम बच्चे ,
लोकतंत्र का इतना अपमान
फिर भी मेरा देश महान ।।