सोमवार, 4 जनवरी 2016

सत्ता पर बैठे ब्रह्नल्ला तो स्वभिमान कैसे जागे

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सत्ता पर बैठा ब्रह्नला तो , 

स्वभिमान कैसे जागे ।


सत्ता पर बैठे ब्रह्नला तो ,
स्वभिमान कैसे जागे ,
अपने स्व पर विश्वास नही ,
तब दुःख दरिद्र कैसे भागे ,
रक्षक ही भक्षक बन बैठे ,
तो सोचो देश बची कैसे ?

जब बोये पेड़ बबूल के ,
तो आमो के फल लगे कैसे ,
रोको इन शूल बबूलों के ,
मधुमास फिर बिकने पाय ,
भारत माँ का अपमान न हो ,
उधान फिर न लूटाने पाये ,
मन के सम्प्रभुता मिटा सके ,
अब गांडीव उठाना ही होगा ,
अंदर - बाहर के दुश्मन के ,
अब वंश मिटाना ही होगा ।।

कफ़न में लिपटी फतह हमारी है , आओ जंग करें

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 आओ जंग करे 


कफ़न में लिपटी फतह हमारी है , आओ जंग करे ।
पोशीदा गुफ्तगू जारी है आओ जंग करे ,
सदाए देती है देंने दो तन्हाई कब्रो को ,
बुझती शमा करती है रहनुमाई कब्रो की ,
एक बार भर दो इसमें बारूद की महक ,
फिर मिलके करेगे हम खुदाई कब्रो की ,

चप्पे -चप्पे पर बिखरती है जान इंसानो की ,
तड़पते लफ्जो में कटी है जबान इंसान की ,
रगो का खून बहता है जमीं पर पानी बन कर ,
जिंदगी मुश्किल पर मौत आसान इंसान की ,

दोस्तों की कारगुजारी है आओ जंग करे ,
पोशीदा गुफ्तगू जारी है आओ जंग करे ,

मानवता पर मजहब भारी है आओ जंग करे ,
भाई पर भाई भारी है आओ जंग करे ,
बे औलाद होने को आई औलाद आदम की ,
कत्ल- ओ -गरद की खुमारी है आओ जंग करे ,
हर एक मरघट पे शिकारी है आओ जंग करे ,

लूट लेते है लाशो से कफ़न दो गज यारो ,
उनकी इंसानो में शुमारी है आओ जंग करे ,

अरे अमन के मुहाफीज कुछ ख्याल करो ,
वक्त जाता है लम्हों से न सवाल करो ,
चन्द सांसे है सीने में धड़कते दिल की तरह ,
इसे गले लगाओ इस्तेबाल करो । आओ प्यार करें ।

मेरे देश के लोग तुम बगावत क्यूँ नही करते

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मेरे देश के लोग तुम बागवट क्यों नही करते



मेरे देश के लोगो तुम शिकायत क्यूँ नही करते ,
तुम इतनी जुल्म सहकर बगावत क्यूँ नही करते ,
ये मेरे देश के लोगो ये लुटेरे क्यूँ चुने तुमने ,
तुम्हारे ऊपर तुम जैसे ही कोई हुकूमत क्यूँ नही करते ,
ये भष्ट्र लुटेरे तुम्हारे मुकद्दर क्यूँ ,
तुम मुकद्दर को बदलने की जुरत क्यूँ नही करती है ?