मंगलवार, 12 जनवरी 2016

भ्रष्ट्राचार पर अंकुश

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भ्राष्ट्राचार पर अंकुश



आज पूरा देश भ्रष्ट्राचार से पीड़ित है । पर केवल भ्रष्ट्राचार - भ्रष्ट्राचार कहने मात्र से भ्रष्ट्राचार खत्म होने वाला नही है ।धरना प्रदर्शन आंदोलन से कुछ होने वाला नही है ।इसकी जड़े 68 बर्ष पुरानी है । जब तक समानता नही होगी तब तक भ्रष्ट्राचार खत्म नही होगी ।यदि देश 1947 में आज़ाद हुआ तो इतने दिनों बाद भी भ्रष्ट्राचार समाप्त क्यों नही हुआ ।इसके विपरीत दिन पर दिन भष्ट्राचार बढ़ते जा रहा है क्यूं ? यहां पर हर बड़े का छोटे पर आतंक है ।जैसे भगवान का भक्त पर मालिक का नौकर पर अधिकारी का कर्मचारी पर जब तक यह भेद भाव खत्म नही होगा तब तक भ्रष्ट्राचार समाप्त नही होगा ।मेरे विचार से यदि आर्थिक गैर बराबरी खत्म कर दी जाय तो कुछ हद तक भ्रष्ट्राचार पर अंकुश लगाया जा सकता है ।

पौधे प्रदूषण में दब न जाय

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आवाज घूंट कर रह न जाय , अभी तो जोर से चीखना बाकी है।




पौधे प्रदूषण में दब न जाय , अभी तो जल से सीचना बाकी है ।
आवाज घूंट कर रह न जाय , अभी तो जोर से चीखना बाकी है ।
जिंदगी की सीखो ने सिखाया जीवन जीना हमें सदा यहां ।
सीखते आये है तो क्या अभी भी बहुत कुछ सीखना बाकी है ।

सचमुच कलियुगी आगया

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दोस्तों ,


दौर सचमुच कलियुगी आ गया ,

देखा जब नेताओं को लड़ते आपस में ,

सच कहता हूँ मुझे चक्कर सा आ गया

ठीक से जिसे बोलने तक नही आता था ,

पड़ा जब नेतागिरी के चक्कर में ,

कमवख्त भाषण सुना कर चला गया ,

दोस्तों दौर सचुमुच कलियुगी आ गया ।।

ये मुद्दा किसी के खिलाफत की नही है

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ये मुद्दा किसी के खिलाफत की नही है ।



ये मुद्दा किसी के खिलाफत की नही है ,
ये मुद्दा किसी की हिफाजत की है ,
ये लड़ाई हम सब की लड़ाई है ,
ये लड़ाई हमारे हक की लड़ाई है ,
आपको जो अच्छा गलत लगे,
या सच्चा गलत लगे ,
पर इस बार करना जरूर ,
बाद में कसक न रह जाय दिल में ,
फिर देते फिरोगे किसको कसूर ।।

घूंघट आँचल कुमकुम काजल गजरा

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नारी की गरिमा



घूंघट , आँचल , कुमकुम , काजल , गजरा , चूड़ी , कंगन नही सुहाते ठीक किन्तु क्यों करती देह प्रदर्शन निकल पड़ी हो अर्धनग्न सी सर पर छतरी तान ।लोक लाज मर्यादा का कुछ तो रखा होता ध्यान , गरिमा अपनी भूल गयी क्यों बोलो क्यों हो मौन नारी की छबि धूमिल करती बतला तू है कौन ?