बुधवार, 13 जनवरी 2016

परेशां हूँ पर परेशानी नही जाती , बचपन तो गया पर नदानी नही जाती ।

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परेशां हूँ पर परेशानी नही जाती ,

बचपन तो गया पर नदानी नही जाती ।




परेशां हूँ पर परेशानी नही जाती ,
बचपन तो गया पर नदानी नही जाती ।

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दोस्तों .
  इल्जामो से बेहतर खामोश रहना ,
लगा लिए है ताले जज़्बात पर ।

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दोस्तों ,
न जाने कितने कांटो का चुभन लेकर एक गुलाब मुस्कराता है ।

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दोस्तों ,
सोचा था घर बनाकर बैठूंगा सकुन से ,
पर घर की जरुरतों ने मुसाफिर बना डाला ।

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दोस्तों ,
होंठों पर "मुस्कान " हर मुश्किल कार्य को आसान कर देती हैं ।

मुखौटा लगाया पहरेदार का ।

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मुखौटा लगाया पहरेदार का,
सबका भरोसा जित कर ,
लूट गया विश्वास ,
भरोसा करने वालो के चेहरे स्याहं हो गए ,
जिंदगी बनाने का दावा करने वालो पर नही करना भरोसा ,
बेईमान चढ़े है हर शिखर पर ,ईमानदार अब तबाह हो गये ।

अपने जीवन की बैलगाड़ी कभी तो हांक करो

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अपने जीवन की बैलगाड़ी कभी तो हांका करो ।




अपने जीवन की बैलगाड़ी कभी तो हांका करो ,
कभी तुम भी भूखे रहो कभी तो फांका करो ।
कहते हो सभी से एसे नही , अरे ! इसे वैसे करो ।
छोडो दोस्तों अपने भी अंदर कभी तो झाँका करो ।

इतिहास करवट बदल रहा है

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इतिहास करवट बदल रहा है



इतिहास करवट बदल रहा है ,
सत्ता की चुल दरकती है ।
मिटटी से तूफ़ान उठा
महलो की नीव सरकती है ।
है बुझी राख से चिंगारी
वो उठी की सत्ताधीशो के ।
ए.सी . से ठंडक न लगे
झुलसती आग बरसती है ।
तुम सेवक हो मालिक न बनो
ये जनता याद दिलाती है ।
अब खाली कर दो सिंहासन
मालिक की सवारी आती है ।