गुरुवार, 14 जनवरी 2016

ये दौर नही रुकने का

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ये दौर नही रुकने का




ये दौर नही है रुकने का ,
ये दौर नही है झुकने का ,
हो चूका है शंखनाद
अब तो बस रण ही रण है
भ्रष्ट्राचार की लड़ाई का अब
आ गया निर्णायक क्षण है ,
जनता का जनता को
जनता के लिये ये आमन्त्रण है ।

हम ऐसे समाज की रचना में जुटें है

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हम ऐसे समाज की रचना में जुटें है जहां साधनो की पवित्रता खत्म हो गई है ।




हम एक ऐसे समाज की रचना में जुटें है जहां साधनो की पवित्रता खत्म हो गयी है और साध्य ही सब कुछ हो गया है ।और यह साध्य है येन केन प्रकारेण धन इकठ्ठा करने में लगे हुय है । यदि वास्तव किसी भी सभ्य समाज में धन शक्ति सर्बोत्तम उपलब्धि और सर्वोत्तम योग्यता का मापदण्ड बन जाती है तो भ्रष्ट्राचार के विरुद्द उठाये गए मजबूत से मजबूत हथियार कुछ दिनों के बाद भोथरे पड़ने लगते है ।

कुछ लोग जिंदगी में गुनाह करके साफ़ निकल जाते

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दोस्तों


 कुछ लोग गुनाह करके भी साफ़ निकल जाते है ,
और कुछ हो जाते है यू ही बदनाम जिंदगी में ।
दोस्ती और रिस्तेदारी तो विश्वास का बन्धन है ,
हर चीज का नही लगाया
जाता दाम जिंदगी में ,
आपकी दोस्ती ने हमे ख़ास बना दिया
वरना हम भी रह जाते आम जिंदगी में ,
संघर्षो से हासिल होता है मुकाम जिंदगी में ,
वैसे तो सभी करते है यह काम जिंदगी में ,
बहुत कम लोग होते है जिन्हें इतिहास याद रखते हैं ,
वाकी सब लोग हो जाते है गुलाम जिंदगी में ।
बड़े ही सलिको से सवार है रूप और यौवन को ,
इसे न करो यू ही बर्बाद जिंदगी में ।
बीमार के दर्द का अंदाज वो क्या लगायेगा ,
जिसे हुआ न कभी जुकाम जिंदगी में ।

अन्याय सहना करने से ज्यादा खतरनाक है

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अन्याय सहना करने से ज्यादा  खतरानाक   है 



हम लोग कायरता के विरुद्द पढ़ बोल सुन सकते पर कुछ कर नही सकते । कायरता के विषाणु हमारे रोम रोम के अंदर घुस आये है । तभी तो डर और खौफ का मंजर समाप्त नही होते ।अन्याय सहना अन्याय करने से ज्यादा खतरनाक है । हम सोचते रहते है कि वो आयेगा और हमे भ्रष्ट्राचार और अन्याय से मुक्ति दिला देगा । और वही तो यह सब करता है और कराता है ,इसके लिये हमे खुद आगे बढ़ना होगा ।
उठ देश कर त्राहि त्राहि ,
अब तो इसे बचाओ ,
एक बार फिर भारी भू पर ,
इन शैतानो के विरुद्द तुम आवाज तो उठावो ।

आपस लड़ लड़ कर मरे क्यों

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हम आपस में लड़ -लड़ कर मरे क्यों ,

 तबाही के लिये एक कुदरत ही काफी है ।।।

हमारे देश के किस्मत

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हमारे देश के किस्मत बड़े ही निराले है , 

अँधेरा फ़ैलाने वालो के घर उजाले है ।

भ्रष्ट्राचार के विरुद्द

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दोस्तों भ्राष्ट्राचार के विरुद्द

 मुझे लगता है भ्रष्ट्राचार के विरुद्द अब कभी जंग नही हो सकती ,
 अलबत्ता हिस्सा बाटने में हो सकती है झगड़ा ,
वसूल करने में नियत तंग नही हो सकती ।।

जिंदगी को करीब से देखो

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ज़िन्दगी को करीब से देखो



जिंदिगी को करीब से देखो , 

इसका चेहरा तुम्हें रुला देगा ।

 

हमसे न पूछो दोस्ती का सिला, 

दुश्मनो का भी दिल हिला देगा।

 

रोज जीत हूँ रोज मरता हूँ ,

 जुल्म खुद अपने साथ करता हूँ ।

 

भीड़ में खो गया कहीं शायद , 

अपना चेहरा तलाश करता हूँ । 

 

सामना हो तो सर झुक लेता हूँ

 पीठ पीछे तो मैं मुकरता हूँ ।

 

वक्त भी किस तरह मेहरबां है ,

 न तो हंसता हूँ न आह भरता हूँ ।।