शुक्रवार, 15 जनवरी 2016

मेरा एक मित्र है

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मेरा एक मित्र है





मेरा एक मित्र है
स्वभाव से विचित्र है
लोग उसे मुर्ख कहते है
उसकी सबसे बड़ी मूर्खता है कि
वह अपनी बीबी से मोहब्बत करता है
भला बताइये बीबी भी
कोई मोहब्बत की चीज है
वह तो घर की मुर्गी है
जब चाहिए साग बनाइये
मोहब्बत तो किसी फ़िल्म वाली से होती है
हुस्न वाली से होती है
अथवा साली से होती है
कभी कभी अड़ोस पड़ोस में भी चल जाती है
उसे क्या मालुम मोहब्बत से जिंदगी में रोमांस रहता है
बॉडी तनी रहती है
मोहब्बत के बिना जिंदगी
 बिना नमक का दाल है
बिना तेल का मशाल है
बीबी तो माँ बाप की पसन्द है
जहां प्यार का द्वार एकदम से बन्द है
बीबी सुनियोजित बवाल है
प्रेमिका तस्करी का माल है
बीबी पथ का संत्रास है
और प्रेमिका वाईपास है
बीबी जेबकतरा है एक्सिडेंट भी है
प्रेमिका बार है रेस्टुरेंट है
बीबी ज्वलनशील है
प्रेमिका घुलनशील है
बीबी निम चढ़े करेला है
प्रेमिका मधुर स्वाद है
बीबी सत्य नरायण की कथा है प्रेमिका प्रसाद है
इसलिये कह रहा हूँ
अबे घड़ाम घोचुं अक्ल के चोचू
बीबी की गुलामी छोडो
मोहब्बत का महाजन बन जा
गजल का शेर निकाल
बेकार का भजन मत गा
अपनी प्रेमिका के लिए रोज मिटा कर
भले ही हर आठवे दसवे दिन
पत्नी से या गलियों में पिटा कर ।


शीर्षाशन में भी

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शीर्षासन में भी


अपने पतिदेव की
नशे की आदत से परेशान
एक पत्नी जब
सारे संभव असंभव उपाय करके भी
नही हुई सफल
तो बेचारी हुई काफी परेशान
प्रत्येक कार्य से थे बिलकुल अनजान
एकाएक शहर में एक योगी राज आये
जिन्होंने योग के द्वारा अनेक कर्तब्य दिखाये
यह पता चलते ही उक्त पत्नी योगी राज से मिली
योगी राज के आश्वासन से
पत्नी के मन में आश की किरण खिली
 योगाभ्यास शुरू हुई
चलता रहा , चला ही रहा और चलता रहा
एक बर्ष के पश्चात
योगी राज ने शराबी की पत्नी से पूछा
योगी राज ने शराबी की पत्नी से पूछा
क्या कुछ परिवर्तन के लक्ष्ण दिखाई नही देते ?
पत्नी बोली जी हाँ वो तो अब
शीर्षाशन में भी काफी सरलता से शारब पी लेते है ।


हमारे देश के किस्मत बड़े ही निराले है

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हमारे देश के किस्मत बड़े ही निराले है


हमारे देश के किस्मत बड़े ही निराले है ,

अँधेरा फ़ैलाने वालो के घर उजाले है ।

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हमारे देश के किस्मत बड़े ही निराले है ,
अँधेरा फ़ैलाने वालो के घर उजाले है ।

हम आपस में लड़ लड़ कर मर क्यों

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हम आपस में लड़ - लड़ कर मरे क्यों 




हम आपस में लड़ -लड़ कर मरे क्यों ,

तबाही के लिये एक कुदरत ही काफी है ।।।

चढ़ती थी उस मजार पे चादरे बेशुमार

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चढ़ती थी उस मजार पे चादरे बेशुमार




चढ़ती थी उस मजार पे चादरे बेशुमार ,

बाहर बैठा एक फकीर ठण्ड से मर गया ।

जरा सी बातों पर बर्षो के यराने गए

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जरा सी बात पर


जरा सी बातो पर बर्षो के याराने गए ,

इतना तो हुआ कुछ लोग पहचाने गए ।

अब भ्रष्ट्राचार के विरुद्द जंग नही हो सकती

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दोस्तों
मुझे लगता है भ्रष्ट्राचार के विरुद्द अब कभी जंग नही हो सकती ,
अलबत्ता हिस्सा बाटने में हो सकती है झगड़ा ,
वसूल करने में नियत तंग नही हो सकती ।।

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दोस्तों ,
मैं कोई पत्थर नही इंसान हूँ ,
कैसे कह दू की गम से नही घबराता ।

मोहब्बत उसे नही होती

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ये दोस्त ,


मोहब्बत उसे नही होती जो खूबसूरत होतें
वल्कि खूबसूरत वो होते है जिनसे मोहब्बत होती है ।
वे मेरे सीने पे सर रख कर सोई थी बेख़बर
ऐ दोस्त मैंने अपने दिल की धड़कन ही रोक ली
कि कहि उसकी नींद न टूट जाय ।

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ब्यंग ताकतवरों के खिलाफ कमजोर का हथियार होता है ।

मूक दर्शक नही हो तुम

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मूक दर्शक नही हो तुम



मूक दर्शक नही हो तुम
तम्हारे मूक होने को इन
लोगो ने बहरा मान लिया है ।
कभी न बहने वाला पानी को हम ठहरा मान लिए ,
इन्हें बता दो जब भी प्रलय आयी है दुनिया बदली है
और यही ठहरी हुई पानी ने अहम किरायदार निभाया है ।