मंगलवार, 19 जनवरी 2016

यहां जिंदगी के पर्दे में मौत पलती है

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खुदा हमको बतादो यह कैसी बस्ती है



खुदा हमको बतादो यह कैसी बस्ती है ,
यहां जिंदगी के पर्दे में मौत पलती है ,
किसी के पावं तो पडतें है फर्श मखमखल पर ,
किसीकी लाश कफ़न के लिये तरसती है ,
मेरे पड़ोस की जालिम ने लूट ली अस्मत ,
कोई जवां लड़की कहती है और जलती है ,
यह कौन लोग है गर्दन को काट के कहते है ,
मस्ती - मस्ती है ....
इंसानियत के घर को गिराते है और कहते हैं ,
आवाज बुलन्द करो खुदा की यह बस्ती है ,
न इनको खौफ -ऐ -खुदा है और न आदमी का ख्याल ,
यह कैसा धर्म है जहां इंसानियत सिसकती है ,
जवां गुंचों को कुचलो ,कली मसल डालो ,
यहां पर जिंदगी महंगी है मौत सस्ती है ,
खुदा हमको बतादो यह कैसी बस्ती है ।


गुंडे के चंगुल से (ब्यंग )

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गुंडे के चंगुल से ( ब्यंग )




गुंडे के चंगुल से
लड़की को बचाते हुए
पुलिस वाला चिल्लाया
हराम..साले
हमारे होते हुए
किसकी हिम्मत की लड़की पर हाथ डाले ।

ब्यंग

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          ब्यंग 



एक पुलिसकर्मी बलत्कार के

आरोप में पकड़ा गया

बेचारा जल्दीबाजी में रगड़ा गया

पेशी में अफसर ने उसे कहा

बावले तूने तो पुरे महकमे का

नाम मिट्टी में मिला दिया

एक तो पुलिसकर्मी , दूसरे बलत्कार , तीसरे रंगे हाथो पकड़ा गया

पुलिसकर्मी घिघियाया

हाथ जोड़ कर गिड़गिड़ाया

हजुर माफ़ करो

मेरे अपराधो को साफ़ करो

मैं यह गलती कभी न दोहराऊंगा

इस बार छोड़ दे तो

आगे से कभी न पकड़ा जाऊंगा ।

देर आये दुरुस्त आये (ब्यंग)

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देर आये दुरुस्त आये( ब्यंग )



देर आये

दुरुस्त आये

वाली कहावत

पुलिस बखूबी निभाती है

जुर्म पहले होता है

पुलिस बाद में आती है ।

ब्यंग

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                ब्यंग






वह ईमानदार है ,

इसलिये बिना दाम के ,

ईमान नही बेचते ,

मगर नेक है ,

मोल भाव नही करते ।


सपने देखने के लिये सोच उधार लेते है

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सपने देखने के लिये सोच उधार लेते है 




मर गई लोगो की चेतना इस कदर की ,

सपने देखने के लिये भी सोच उधार लेते हैं ,


अपनी मंजिल वो क्या पायेगें ,

जो हम राह के रुप में कच्ची यार लेते हैं ,


अपनी ख्वाबो में चाहे कितने भी देखे सपने आकाश में उड़ने के ,

पर इंसान को पंख नही होते .

फिर भी कुछ लोग उड़ने की अरमान पाल लेते है ।


मेरी बर्बादियों में सिर्फ तेरा हाथ है

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मेरी बर्बादियों में सिर्फ तेरा हाथ है 



मेरी बर्बादियों में सिर्फ तेरा हाथ है

मगर मैं सबसे कहता हूँ ये मुक्क़दर की बात है ।

ये भी गया सब जाते है

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ये भी गया सब भी जाते है

फिर मरने से क्यों डरते है

मरते है लोग हर दिन कीड़ो की तरह

याद वही रह जाते है को कुछ कर जाते है ।