शनिवार, 23 जनवरी 2016

जीवन है एक चुनौती 

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जीवन है एक चुनौती






जीवन है एक चुनौती ,
हमेशा स्वीकार कीजिये ,
संघर्ष कठिनाइयों से झूझते हुए ,
निरन्तर मेहनत बेशुमार कीजिये ,
धैर्य में छिपी हुई है सफलता ,
पाने के लिए इंतजार कीजिये ,
मत बैठिये असफलता से हार कर ,
जित के लिये कोशिश बराबर कीजिये ,
कांटो से भरे होते है रास्ते लक्ष्य के ,
चुभते हुये उन्हें पार कीजिये ,
गिर कर भी संभलने की शक्ति हो ,
इतना खुद को तैयार कीजिये ,
इसलिये कभी न अहंकार कीजिये ,
जीवन एक चुनौती है ,
हमेशा स्वीकार कीजिये ।।

भ्रष्ट्राचार

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भ्रष्ट्राचार

दुनिया के किसी भी समाज में भ्रष्ट्राचार को संस्थागत रूप देने के तर्को को स्वीकार नही किया जाता ।लोकतंत्रिक समाज में इस बुराई से लड़ने के लिए साधारण जन ही आगे आते है ।हमारे यहां बदकिस्मती से जितने भी सत्ताधारी दल है प्रायः सभी दल एक ही थैली के चट्टे - बट्टे है ।जीवन का कोई भी क्षेत्र भ्रष्ट्राचार से मुक्त नही है ।और बिपक्ष भी इसका मूक समर्थन करती है और अपना दामन बचाने में लगी रहती है ।

जिन्हें तूने ह्रदय में स्थान न देकर अस्पृश्यता का दंश दिया

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ये मेरे अभागे देश


ये मेरे अभागे देश ,
जिन्हें तूने ह्रदय में स्थान न देकर ,
अस्पृश्यता का दंश दिया है ,
अपना समकक्ष बैठने की वंचना दिया है ,
और अपमानित किया है ,

एक दिन तुझे भी उनके साथ अपमानित होना होगा ,
जन्हें जातीय पहचान से जोड़कर ,
बृहत समाज में घुल मिल,
जाने से वंचित रखा ,
भुखमरी और अशिक्षा से प्रताड़ित किया ,
एक दिन तुझे उनके साथ अपमानित होना होगा ।
जिन्हें तूने अपने चरणों के पास आसन दिया है ,
उपेक्षा और निर्दयता दी है
वे तुम्हारा आँचल
कड़े है
और अपनी और खिंच रहे हैं ,
तुझे भी उनके साथ
अपमानित हिना होगा ।
सदियो से शोषित और लाचार है
हाथ पसारे या हाथ जोड़े
नतमस्तक रहते है ,
जिनके अस्तित्व को तुमने ,
भाग्य का बिडम्बना मान ,
उपेक्षित किया है ,
तुझे भी उनके साथ ,
अपमानित होना होगा ।
अब यदि तुमने उन्हें
अपनी गोद में उठाकर
गले न लगाया
तो वे तम्हें अपनी और खीच लेंगे ,
नीचे बहुत नीचे ,
अपने ह्रदय में स्थान न दिया
तो एक दिन
चिता की राख में उनके साथ मिलकर
तुझे भी अपमानित होना होगा ।।

एक बार भारत माँ तू माँ दुर्गा बनके आओ

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एक बार भारत माँ तू दुर्गा बनके आओ





है कराहता कण - कण

माँ सारे दुःख कष्ट मिटाओ ,

एक बार भारत माँ तू

माँ दुर्गा बनके आओ ।

झूट सत्य को निगल रहा

है गल्ली पुण्य की काया ,


दिशा - दिशा में क्रूर पाप ने

अपना जाल बिछाया ,

दो निष्ठा तप त्याग

प्रेम का अमृत कलश छलकाओ ,

एक बार भारत माँ तू

माँ दुर्गा बनके आओ ।


हुआ अस्त दिनकर विवेक का


महानाश गहराया ,

मिटी आज उर-उर से लो

शीतल करुण की छाया ,

भर हूंकूति सब मिटा धुंध

सुख शान्ति सब धरा पर लाओ ,

एक बात भारत माँ तू

माँ दुर्गा बनके आओ ।।