शनिवार, 23 अप्रैल 2016

अमर शहीद श्री अशफाकउल्ला ख़ाँ ' हसरत ' का मौत से पहले देशवासियों के नाम सन्देस

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अमर शहीद श्री अशफाकउल्ला खाँ वारसी ' हसरत ' का मौत से पहले देश वासियों के नाम एक सन्देश 


            अमर शहीद श्री अशफाकउल्ला खाँ वारसी ' हसरत ' हमेशा के लिए कब्र में दफना दिये गये । पर मौत से पहले देशवासियों के नाम एक सन्देश छोड़ गये थे जो इस प्रकार से है - ' प्यारे भारतवासी भाईयों ! आप कोई हो , चाहे जिस धर्म सम्प्रदाय के अनुयायी हो , आप देश - हित के काम में एक होकर योग दीजिये । आप ब्यर्थ में लड़ - झगड़ रहे है ।सब धर्म एक है , रास्ते चाहे भिन्न - भिन्न हो ; किन्तु लक्ष्य सबका एक ही है ।फिर झगड़ा बखेड़ा क्यों ? हम मरने वाले काकोरी के अभियुक्तों के लिए आप लोग एक हो जाइये और सब मिल कर नौकरशाही का मुकाबला कीजिये ।.... भारतवासी मुसलमानो में सबसे पहला मुसलमान मै हूँ , भारत की आज़ादी के लिए फांसी पर चढ़ते हुए , मन - ही - मन गर्व का अनुभव कर रहा हूँ । किन्तु मै विश्वास दिलाना चाहता हूँ कि मै हत्यारा नही था , जैसा कि मुझे साबित किया गया है -

दिल फ़िदा करते है , क़ुर्बाने जिगर करते हैं ,

पास जो कुछ है वह , माता की नजर करते है ,

खाने वीरान कहाँ , देखिये घर करते है ,

खुश रहो अहले वतन , हम तो सफर करते है ।


                इस सन्देश के बाद हम तो यही कहेंगे -अत्याचार जब निरंकुश होकर तांडव - नर्तन करने, लगता है तब बलिवेदी पर चढ़ने के लिए तत्पर होने के अतिरिक्त अन्य उपाय ही क्या है !'
             कीड़े मकौड़े की मौत न मरकर , वीरो की तरह मरने वाले का ही नाम इतिहास मे स्वर्णाक्षरों में लिखा जाता है !'
         यह देश उसी का है , जो वतन के काम आये ........